आंध्र प्रदेश में बन रहा गूगल डेटा सेंटर:आरोप- 160 एकड़ जंगल साफ, पानी की कमी होगी; गूगल बोला- एयर कूलिंग तकनीक का इस्तेमाल होगा
आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में गूगल का डेटा सेंटर बन रहा है। तीन कैंपस बनेंगे। राज्य सरकार ने 3 गांवों की 586 एकड़ जमीन दी है। अदाविवरम-मुदासरलोवा गांव में काम शुरू हो चुका है। 160 एकड़ में जंगल काटने और जमीन समतल करने के लिए पहाड़ी छीलने के आरोप हैं। वन्यजीव अभयारण्य और जलाशय के पास होने से पर्यावर
आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में गूगल का डेटा सेंटर बन रहा है। तीन कैंपस बनेंगे। राज्य सरकार ने 3 गांवों की 586 एकड़ जमीन दी है। अदाविवरम-मुदासरलोवा गांव में काम शुरू हो चुका है। 160 एकड़ में जंगल काटने और जमीन समतल करने के लिए पहाड़ी छीलने के आरोप हैं। वन्यजीव अभयारण्य और जलाशय के पास होने से पर्यावरणविद भी प्रोजेक्ट का विरोध कर रहे हैं। गांव वालों का कहना है, ‘जमीन उनकी आजीविका का आधार थी।’ तरलुवाड़ा की पूर्व सरपंच पायला कोंडम्मा ने कहा, ‘सर्वे के समय अफसरों ने भरोसा दिलाया था कि जमीन हमारी रहेगी। किसान अप्पलाराजू ने आरोप लगाया कि वर्षों पहले आवंटित जमीन अब ली जा रही है। 15 अरब डॉलर यानी करीब ₹1.3 लाख करोड़ का AI हब बन रहा है। इसमें बड़े डेटा सेंटर और अंतरराष्ट्रीय समुद्र के नीचे बिछने वाली इंटरनेट केबलों का नेटवर्क शामिल है। निर्माण अप्रैल 2026 में शुरू हुआ और कंपनी के मुताबिक, यह 2028 में चालू हो सकता है। विजाग परियोजना में तीन मुद्दे प्रमुख गूगल बोला- हम पानी बचाने एयर कूलिंग टेक्नोलॉजी अपनाएंगे 'बैंगलोर क्लाइमेट डेटा वीक' में, गूगल में डेटा सेंटर कम्युनिटी और वर्कफोर्स डेवलपमेंट में काम करने वाली आरती आहूजा ने कहा कि जब भी गूगल कहीं अपना काम शुरू करने की कोशिश करता है, तो उस इलाके के मौसम के हालात को समझने की कोशिश करता है। पानी की उपलब्धता और पानी के स्रोतों का अच्छी तरह से आकलन करता है। इसीलिए हमने सोच-समझकर एयर कूलिंग टेक्नोलॉजी अपनाने का फैसला किया है। इसमें लिक्विड कूलिंग की तुलना में कम पानी की जरूरत होगी। 2 देशों के हालात, जहां डेटा सेंटर बने