मूली उखाड़ने गई सास-बहू की मौत: जिंदगी संवारने आए, जीवन उजड़ गया; हाथों की मेहंदी भी न छूटी, अब उठी अर्थी
जिंदगी बनाने के लिए बदायूं का गांव छोड़ा। सोचा था कि गाजियाबाद में मेहनत-मजदूरी और सब्जियों की खेती से परिवार की जरूरतें पूरी होंगी। बच्चों की गृहस्थी बसेगी और धीरे-धीरे जिंदगी की मुश्किलें कम होती जाएंगी।
The Bharath News1 min readSource: Amar Ujala
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जिंदगी बनाने के लिए बदायूं का गांव छोड़ा। सोचा था कि गाजियाबाद में मेहनत-मजदूरी और सब्जियों की खेती से परिवार की जरूरतें पूरी होंगी। बच्चों की गृहस्थी बसेगी और धीरे-धीरे जिंदगी की मुश्किलें कम होती जाएंगी।
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