सुप्रीम कोर्ट बोला-कोहली से बिना पटाखे दिवाली की अपील कराएं:जागरूकता के लिए ऐसी शख्सियतों की मदद लें; प्रदूषण से 20 लाख मौतों के दावे पर टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को बिना पटाखे चलाए दिवाली मनाने को लेकर सुझाव दिया। कोर्ट ने कहा कि विराट कोहली जैसी मशहूर शख्सियतों की मदद से लोगों को जागरूक किया जा सकता है। जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस पीबी वराले की बेंच दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण मामले की सुनवाई कर रही थी। जस्टिस वराले ने कहा, 'जनता
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को बिना पटाखे चलाए दिवाली मनाने को लेकर सुझाव दिया। कोर्ट ने कहा कि विराट कोहली जैसी मशहूर शख्सियतों की मदद से लोगों को जागरूक किया जा सकता है। जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस पीबी वराले की बेंच दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण मामले की सुनवाई कर रही थी। जस्टिस वराले ने कहा, 'जनता को जागरूक करने के लिए अच्छे खिलाड़ियों या जीवन के किसी भी क्षेत्र में सम्मानित लोगों की सेवाएं क्यों नहीं ली जा सकतीं?' कोर्ट ने सुझाव दिया कि मशहूर हस्तियों से ऐसे वीडियो या मैसेज रिकॉर्ड कराए जा सकते हैं, जिनमें वे लोगों से प्रदूषण बढ़ाए बिना दिवाली मनाने की अपील करें। कोर्ट ने अधिकारियों से कहा कि पटाखों पर लगी पाबंदियों का टीवी, अखबारों और दूसरे माध्यमों से प्रचार किया जाए। पटाखा मामले में सुप्रीम कोर्ट की 5 बड़ी बातें... 1. दिवाली मूल रूप से रोशनी का त्योहार है। पटाखों की वजह से प्रदूषण की समस्या बढ़ी। बारूद के इस्तेमाल के साथ 14वीं और 15वीं शताब्दी के आसपास आतिशबाजी की परंपरा आई होगी। 2. लोगों तक यह संदेश पहुंचाना जरूरी है कि त्योहार मनाने के लिए ऐसी गतिविधियां करना जरूरी नहीं है, जिनसे दूसरों को नुकसान पहुंचे। बच्चों को भी पटाखों से होने वाले प्रदूषण के नुकसान के बारे में बताया जाना चाहिए। 3. दिवाली से लोगों की धार्मिक भावनाएं जुड़ी हैं, लेकिन इन भावनाओं के साथ सार्वजनिक स्वास्थ्य और संविधान से मिले अधिकारों का भी ध्यान रखना होगा। 4. आज के बच्चे समझते हैं कि पटाखों से दूसरों को परेशानी होती है। अगर आप बच्चों को सही तरीके से समझाएंगे तो वे अपने माता-पिता से पटाखे न जलाने के लिए कहेंगे। नई पीढ़ी दिवाली मनाना चाहती है, लेकिन वे पटाखों में विश्वास नहीं करते। इसका कितना बड़ा असर हो सकता है, यह समझिए। 5. फिलहाल हम पटाखों पर पूरी तरह बैन लगाने के पक्ष में नहीं है। ऐसा प्रतिबंध कई तरह की दूसरी समस्याएं पैदा कर सकता है। कोर्ट ने अधिकारियों को चेतावनी दी कि यदि वे निर्देशों को लागू नहीं करेंगे तो सख्त रुख अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। कोर्ट में बताया- देश में वायु प्रदूषण से 20 लाख मौतें ग्रीन पटाखों की बिक्री और जांच पर सवाल उत्तरा बब्बर ने कहा कि पटाखे जलाने से बड़ी मात्रा में खतरनाक पार्टिकुलेट मैटर (PM) निकलता है। यह मानव शरीर में जाकर फेफड़ों और दूसरे अंगों को नुकसान पहुंचाता है। उन्होंने कहा कि पिछले हफ्ते दशहरा के दौरान दिल्ली-NCR में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) में बढ़ोतरी हुई। बिक रहे पटाखे वास्तव में ग्रीन पटाखे हैं या नहीं, इसकी जांच के लिए उचित व्यवस्था नहीं है। दूसरी याचिका में याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले भी कई आदेश दे चुका है। इन निर्देशों का उल्लंघन हुआ है। पटाखों के निर्माण पर रोक लगनी चाहिए। 30 सितंबर: कोर्ट ने कहा था- 24 घंटे पटाखे चलाने की परमिशन नहीं दे सकते 30 सितंबर को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि वह पटाखों पर पूरी तरह रोक नहीं लगाएगा। कोर्ट ने यह भी कहा था कि वह चौबीसों घंटे पटाखे जलाने की अनुमति नहीं देगा। बेंच ने कहा था कि बीच का रास्ता निकालना जरूरी है। इसके लिए पटाखे जलाने के तय समय निर्धारित किए जा सकते हैं। इस सुनवाई में एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने एक नोट दिया था। इसमें CSIR-NEERI की सिफारिश के आधार पर ग्रीन क्रैकर्स के लिए सीमित और सशर्त छूट पर विचार करने की बात कही गई थी। नोट में यह भी कहा गया था कि इन खास पटाखों की अनुमति तभी दी जा सकती है, जब इनका निर्माण केवल लाइसेंस प्राप्त निर्माता करें। इनमें प्रतिबंधित केमिकल नहीं होने चाहिए। पिछले साल ग्रीन पटाखों को सशर्त अनुमति दी थी पिछले साल अक्टूबर में सुप्रीम कोर्ट ने दिवाली से पहले दिल्ली-NCR में ग्रीन पटाखों की बिक्री और इस्तेमाल की अनुमति दी थी। यह छूट परंपराओं और पर्यावरण व स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के बीच संतुलन बनाने की शर्तों के साथ दी गई थी। कोर्ट ने साफ किया था कि ग्रीन पटाखों का इस्तेमाल दिवाली से एक दिन पहले और दिवाली के दिन तय समय के दौरान ही किया जा सकेगा। कोर्ट ने यह भी कहा था कि यह छूट टेस्ट केस के तौर पर दी जा रही है। यह केवल तय अवधि के लिए लागू होगी।