ईरान ने ब्रिटिश नौसेना-वायुसेना को आतंकी घोषित किया:अमेरिका-इजराइल की मदद का आरोप; 3 महीने पहले ब्रिटेन ने IRGC को आतंकी संगठन बताया था
ईरान ने ब्रिटेन की नौसेना और वायुसेना को आतंकी संगठन घोषित कर दिया है। साथ ही उसकी खुफिया एजेंसी MI6 को दुश्मन समूह बताया है। ईरानी विदेश मंत्रालय ने रविवार को इसकी घोषणा की। ईरान ने आरोप लगाया कि ब्रिटेन ने अमेरिका और इजराइल को उसके खिलाफ जंग में मदद दी थी। इसके लिए सैन्य ठिकाने और दूसरी सुविधाएं भ
ईरान ने ब्रिटेन की नौसेना और वायुसेना को आतंकी संगठन घोषित कर दिया है। साथ ही उसकी खुफिया एजेंसी MI6 को दुश्मन समूह बताया है। ईरानी विदेश मंत्रालय ने रविवार को इसकी घोषणा की। ईरान ने आरोप लगाया कि ब्रिटेन ने अमेरिका और इजराइल को उसके खिलाफ जंग में मदद दी थी। इसके लिए सैन्य ठिकाने और दूसरी सुविधाएं भी मुहैया कराई थीं। इसके पहले ब्रिटेन ने 13 जुलाई को ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) को आतंकी संगठन बताते हुए उस पर सख्त प्रतिबंध लगाए थे। इसके तहत ब्रिटेन में IRGC की मदद करने या उसका समर्थन करने पर 14 साल तक की जेल हो सकती है। ईरान ने ब्रिटेन के इसी फैसले के खिलाफ कार्रवाई की है। ईरान की चेतावनी- नतीजों के लिए ब्रिटेन जिम्मेदार होगा ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि ब्रिटेन के खिलाफ ये कदम देश की सुरक्षा के लिए उठाया गया है। मंत्रालय ने चेतावनी दी कि इस फैसले के बाद जो भी नतीजे होंगे, उनकी जिम्मेदारी ब्रिटेन सरकार की होगी। दरअसल, मार्च 2026 में ब्रिटेन ने अमेरिका को अपने दो सैन्य ठिकानों- RAF फेयरफोर्ड और डिएगो गार्सिया के इस्तेमाल की परमिशन दी थी। इन ठिकानों से अमेरिका ईरान के मिसाइल ठिकानों पर हमले कर सकता था। ब्रिटेन ने इस फैसले को अपने सहयोगी देशों की सुरक्षा के लिए जरूरी बताया था। वहीं, ईरान ने इसे अमेरिका की सैन्य कार्रवाई में ब्रिटेन का साथ देना माना। ईरानी सेना बोली- अमेरिकी हमले का मुंहतोड़ जवाब देंगें ईरानी सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद अकरमिनिया ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि अगर उसने दोबारा हमला किया तो जंग सिर्फ पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगी। उन्होंने कहा कि अमेरिका के किसी भी हमले का तुरंत और पहले से ज्यादा बड़ा जवाब दिया जाएगा। अगली जंग पहले के मुकाबले लंबी भी चल सकती है। दरअसल, कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि अमेरिका 4 नवंबर को ईरान पर फिर हमला कर सकता है। होर्मुज स्ट्रेट खोलने को लेकर भी बातचीत जारी ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के बावजूद कतर के जरिए दोनों देशों में बातचीत की कोशिशें जारी हैं। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा था कि अगर अमेरिका उसकी शर्तें मान लेता है, तो ईरान दो दिन के भीतर होर्मुज स्ट्रेट खोलने के प्रस्ताव पर विचार कर सकता है। ईरान की शर्तों में उस पर लगे प्रतिबंध हटाना और पश्चिम एशिया से अमेरिकी सेना की मौजूदगी कम करना शामिल है। हालांकि, ईरान के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी मोहसिन रेजाई ने कहा है कि जब तक उसकी सातों मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक कोई बातचीत नहीं होगी। अमेरिका संग बातचीत में ईरान की तीन बड़ी मांगें तेल बेचने की छूट बहाल हो: ईरान चाहता है कि अमेरिका उसे तेल बेचने की पहले जैसी छूट दे। आर्थिक प्रतिबंध हटे: ईरान पर लगे अमेरिकी प्रतिबंध खत्म किए जाएं, ताकि उसकी अर्थव्यवस्था को राहत मिले। कतर में जमा 6 अरब डॉलर वापस मिले: ईरान चाहता है कि कतर में रोकी गई उसकी करीब 6 अरब डॉलर की रकम उसे वापस दी जाए। -------------------------- यह खबर भी पढ़ें… होर्मुज में हमले का नया तरीका, जहाज पर बम चिपकाया: धमाके से इंजन रूम जला, 27 भारतीय मौजूद थे, सभी सुरक्षित होर्मुज में गुरुवार को 27 भारतीय क्रू सदस्यों वाले तेल टैंकर MT लुईस 1 पर हमला हुआ। पनामा के झंडे वाले इस टैंकर के पास एक छोटी नाव पहुंची थी। पूरी खबर पढ़ें…