रिपोर्ट- नेतन्याहू आइजनकोट के साथ सरकार बनाने को तैयार:अरब पार्टियों के विपक्ष को मिले समर्थन से डरे; चुनाव में किसी दल को बहुमत नहीं
इजराइल में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू विपक्षी नेता गादी आइजेनकोट के साथ मिलकर सरकार बनाने तैयार हैं। इजराइली मीडिया i24 न्यूज के मुताबिक, नेतन्याहू को चिंता है कि आइजेनकोट अरब पार्टियों के समर्थन से वैकल्पिक सरकार बना सकते हैं। इससे नेतन्याहू को सत्ता छोड़नी पड़ सकती है। यही वजह है कि नेतन्याहू
इजराइल में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू विपक्षी नेता गादी आइजेनकोट के साथ मिलकर सरकार बनाने तैयार हैं। इजराइली मीडिया i24 न्यूज के मुताबिक, नेतन्याहू को चिंता है कि आइजेनकोट अरब पार्टियों के समर्थन से वैकल्पिक सरकार बना सकते हैं। इससे नेतन्याहू को सत्ता छोड़नी पड़ सकती है। यही वजह है कि नेतन्याहू ने आइजेनकोट के साथ गठबंधन की संभावना को खारिज नहीं किया है। हालांकि, आइजेनकोट ने अब तक इस प्रस्ताव पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। दरअसल, जॉइंट लिस्ट और राअम जैसी अरब पार्टियों ने रविवार को आइजनकोट को समर्थन देने का ऐलान किया था। इस समर्थन के बाद आइजनकोट को 67 सांसदों का साथ मिलने की संभावना है। इजराइल में 27 अक्टूबर को हुए चुनाव में किसी भी गठबंधन को बहुमत नहीं मिला था। 120 सदस्यों वाली संसद में बहुमत के लिए 61 सीटों की जरूरत है। नेतन्याहू के समर्थन वाले गठबंधन को 53, आइजनकोट के विपक्षी गठबंधन को 48 और अरब पार्टियों को 19 सीटें मिली हैं। नेतन्याहू के पास सरकार बनाने के तीन रास्ते पहला रास्ता: विपक्षी दलों को अपने साथ लाना नेतन्याहू विपक्षी गठबंधन में शामिल कुछ दलों या सांसदों को अपने साथ लाने की कोशिश कर सकते हैं। विपक्ष के पास कुल 48 सीटें हैं। अगर इनमें से कुछ दल या सांसद नेतन्याहू का साथ देने को तैयार हो जाते हैं, तो वे बहुमत के लिए जरूरी 61 सीटों का आंकड़ा हासिल कर सकते हैं। चुनौती: चुनाव में विपक्षी दलों ने नेतन्याहू को सत्ता से हटाने के लिए वोट मांगे थे। ऐसे में उनके लिए अब उन्हीं के साथ सरकार बनाना राजनीतिक रूप से मुश्किल होगा। इससे उनके समर्थकों के बीच भी नाराजगी पैदा हो सकती है। दूसरा रास्ता: राष्ट्रीय एकता सरकार बनाना नेतन्याहू विपक्षी नेता गादी आइजनकोट और उनके सहयोगियों के साथ मिलकर राष्ट्रीय एकता सरकार बना सकते हैं। इसमें अलग-अलग विचारधारा वाली पार्टियां एक साथ सरकार चलाती हैं। इस तरह की सरकार बनने पर नेतन्याहू प्रधानमंत्री बने रह सकते हैं। आइजनकोट और उनके सहयोगियों को भी सत्ता में भागीदारी मिल सकती है। चुनौती: आइजनकोट चुनाव में नेतन्याहू को हटाने के वादे के साथ उतरे थे। उनके समर्थक भी नेतन्याहू के खिलाफ हैं। ऐसे में उनके लिए नेतन्याहू के नेतृत्व में सरकार बनाना आसान नहीं होगा। तीसरा रास्ता: अल्पमत सरकार बनाना नेतन्याहू अल्पमत सरकार बनाने का विकल्प भी चुन सकते हैं। ऐसी सरकार के पास अपने गठबंधन में बहुमत के लिए जरूरी 61 सांसद नहीं होते। वह संसद में दूसरे दलों के बाहरी समर्थन या उनके विरोध नहीं करने के भरोसे काम करती है। इसके लिए नेतन्याहू को कुछ ऐसी पार्टियों का समर्थन जुटाना होगा, जो सरकार में शामिल हुए बिना संसद में उनके पक्ष में वोट करें या अहम मौकों पर विरोध न करें। चुनौती: ऐसी सरकार को बजट पास कराने, विश्वास मत जीतने और दूसरे जरूरी फैसलों के लिए बार-बार दूसरे दलों का समर्थन जुटाना पड़ता है। इसलिए इसे लंबे समय तक चलाना मुश्किल हो सकता है। आइजनकोट के पास सरकार बनाने के दो रास्ते पहला रास्ता: अरब पार्टियों के समर्थन से सरकार बनाना आइजनकोट के सामने सबसे मजबूत विकल्प अरब पार्टियों का समर्थन लेकर सरकार बनाने का है। दोनों का समर्थन मिलने पर आइजनकोट के पास 67 सांसदों का साथ हो सकता है। यह बहुमत से 6 ज्यादा है। चुनौती: इजराइल की राजनीति में अरब पार्टियों को लेकर गहरा विरोध है। नेतन्याहू ऐसे गठबंधन का विरोध करते रहे हैं। विपक्षी गठबंधन के भीतर भी अरब पार्टियों के साथ सरकार बनाने को लेकर सभी दल एकमत नहीं हैं। आइजनकोट के सहयोगी नेता लिबरमैन पहले ही इसकी आलोचना कर चुके हैं। दूसरा रास्ता: यहूदी दलों को गठबंधन में शामिल करना आइजनकोट अरब पार्टियों के बजाय कट्टरपंथी यहूदी धार्मिक दलों को अपने साथ लाने की कोशिश भी कर सकते हैं। इनमें यूनाइटेड तोराह जूडिज्म (UTJ) सबसे अहम है। यह पार्टी अब खुद को नेतन्याहू के गठबंधन का हिस्सा नहीं मान रही है। पार्टी के नेता सरकार बनाने से पहले अपनी रणनीति पर चर्चा भी कर चुके हैं। अगर UTJ और दूसरे छोटे दल आइजनकोट को समर्थन देने के लिए तैयार हो जाते हैं तो उन्हें अरब पार्टियों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। चुनौती: सेना में अनिवार्य सैन्य भर्ती को लेकर दोनों के बीच मतभेद है। क्या नेतन्याहू भी अरब पार्टियों का समर्थन ले सकते हैं? सबसे पहले संसद के स्पीकर को हटाने की तैयारी विपक्षी गठबंधन की शुरुआती योजना संसद के स्पीकर आमिर ओहाना को उनके पद से हटाने की है। ओहाना नेतन्याहू की लिकुड पार्टी के नेता हैं। विपक्ष संसद के कामकाज पर अपना नियंत्रण चाहता है, ताकि कई अहम विधेयक पास कराए जा सकें। इनमें 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले को रोकने में हुई नाकामी की जांच के लिए एक स्वतंत्र सरकारी जांच आयोग बनाने का प्रस्ताव भी शामिल है। हालांकि, नए स्पीकर के नाम को लेकर विपक्षी दलों के बीच अभी सहमति नहीं बन पाई है। इस पद को लेकर विवाद इसलिए भी अहम है, क्योंकि एक बार नया स्पीकर चुने जाने के बाद उसे हटाना बेहद मुश्किल होगा। इसके लिए 120 सदस्यों वाली संसद में 90 सांसदों का समर्थन जरूरी होगा। यह संख्या जुटाना लगभग असंभव माना जाता है। सरकार नहीं बनी तो क्या दोबारा चुनाव होंगे? अगर नेतन्याहू और आइजेनकोट, दोनों में से कोई भी 61 सांसदों का समर्थन जुटाने में नाकाम रहता है तो इजराइल में दोबारा चुनाव कराने की नौबत आ सकती है। हालांकि, अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि दोबारा चुनाव निश्चित हैं। दोनों गठबंधनों के पास बातचीत और दूसरे दलों का समर्थन जुटाने के विकल्प मौजूद हैं। राष्ट्रपति इसाक हर्जोग अगली संसद में शामिल सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे। इस दौरान पार्टियां बताएंगी कि वे किस नेता को सरकार बनाने की जिम्मेदारी देने की सिफारिश करती हैं। इसके बाद राष्ट्रपति तय करेंगे कि किस नेता को सरकार बनाने का मौका दिया जाए। अगर इन कोशिशों के बावजूद कोई भी नेता सरकार बनाने में सफल नहीं होता है तो दोबारा चुनाव ही आखिरी रास्ता बच सकता है। इजराइल चुनाव के बाद अब तक क्या-क्या हुआ 27 अक्टूबर: चुनाव हुए, किसी को बहुमत नहीं इजराइल में संसदीय चुनाव हुए। 77.9% मतदान हुआ। नेतन्याहू गठबंधन को 53, आइजनकोट गठबंधन को 48 और अरब पार्टियों को 19 सीटें मिलीं। बहुमत के लिए 61 सीटें जरूरी थीं। 29 अक्टूबर: चुनाव में विदेशी दखल और वोट चोरी का आरोप लगा लिकुड ने अरब पार्टियों पर वोट खरीदने का आरोप लगाया। राअम पार्टी ने आरोपों से इनकार किया। शिन बेट ने विदेशी दखल की जांच शुरू की। 31 अक्टूबर: यहूदी-अरब गठबंधन के समर्थन में प्रदर्शन इजराइल में लोगों ने यहूदी और अरब पार्टियों को मिलाकर सरकार बनाने की मांग की। नेतन्याहू के समर्थकों ने ऐसे गठबंधन का विरोध किया। 1 नवंबर: आइजनकोट ने सरकार बनाने के लिए 4 शर्तें रखीं आइजनकोट ने गठबंधन के लिए चार शर्तें रखीं। जॉइंट लिस्ट ने कहा कि उनकी पार्टी नेतन्याहू को हटाने में विपक्ष की मदद करेगी और बाहर से समर्थन दे सकती है। ---------------------------------- यह खबर भी पढ़ें… इजराइल में आइजनकोट ने गठबंधन की 4 शर्तें रखीं: हरेदी समुदाय को भी सैन्य सेवा देनी होगी; नेतन्याहू को हटाने के लिए विपक्ष से बातचीत इजराइल में विपक्षी नेता गादी आइजनकोट ने नई सरकार बनाने के लिए 4 शर्तें रखी हैं। इजराइली मीडिया वायनेट के मुताबिक, इनमें हरेदी समुदाय को सैन्य सेवा देना अनिवार्य होगा। पूरी खबर पढ़ें..