जंगलों की आग ने बिगाड़े 3 देशों के रिश्ते:इंडोनेशिया के जहरीले धुएं से मलेशिया-सिंगापुर परेशान, विरोध करने पर गैस सप्लाई घटाई
इंडोनेशिया के जंगलों में लगी आग का धुआं पड़ोसी देशों मलेशिया और सिंगापुर के लिए मुसीबत बन गया है। कालिमंतान, पापुआ और सुमात्रा के जंगलों से उठ रहा जहरीला धुआं हवा के साथ इन देशों तक पहुंच रहा है। इससे लोगों को सांस लेने में परेशानी और सिरदर्द जैसी समस्याएं हो रही हैं। मलेशिया के कुछ इलाकों में स्कूल
इंडोनेशिया के जंगलों में लगी आग का धुआं पड़ोसी देशों मलेशिया और सिंगापुर के लिए मुसीबत बन गया है। कालिमंतान, पापुआ और सुमात्रा के जंगलों से उठ रहा जहरीला धुआं हवा के साथ इन देशों तक पहुंच रहा है। इससे लोगों को सांस लेने में परेशानी और सिरदर्द जैसी समस्याएं हो रही हैं। मलेशिया के कुछ इलाकों में स्कूल बंद करने पड़े हैं। धुआं कई हफ्तों से बना हुआ है, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ रही है। मलेशिया में लोगों ने इंडोनेशिया के उत्पादों का बहिष्कार शुरू कर दिया है, जबकि सिंगापुर ने आग से जुड़ी कंपनियों की जांच शुरू की है। इस बीच इंडोनेशिया ने सिंगापुर को गैस का निर्यात घटाने का ऐलान किया है। उसने इसकी वजह अपने देश की ऊर्जा जरूरतों को बताया है। खेती के लिए जंगलों में लगाई जाती है आग इंडोनेशिया में जंगलों में आग लगने की घटनाएं हर साल होती हैं। इसकी बड़ी वजह खेती और कारोबार के लिए जंगलों को साफ करना है। खासतौर पर पाम ऑयल की खेती के लिए बड़े इलाकों में जमीन तैयार की जाती है। इसके लिए कई जगह जंगलों में आग लगाई जाती है। आग जमीन के नीचे मौजूद पीटलैंड तक फैल जाए तो इसे बुझाना और मुश्किल हो जाता है। पीटलैंड में मौजूद सूखे जैविक पदार्थ आग को लंबे समय तक सुलगाए रखते हैं। इस साल अल नीनो के कारण इंडोनेशिया के जंगलों और पीटलैंड में सूखे की स्थिति ज्यादा गंभीर रही। इससे आग तेजी से फैली और उस पर काबू पाना मुश्किल हो गया। आमतौर पर इस तरह के धुएं का असर मलेशिया और सिंगापुर में कुछ दिनों तक रहता है, लेकिन इस बार यह कई हफ्तों से बना हुआ है। मलेशिया में बहिष्कार, सिंगापुर में सरकार की आलोचना धुएं से परेशान मलेशिया के लोगों ने इंडोनेशिया के उत्पादों का बहिष्कार शुरू कर दिया है। मलेशियाई सांसद सैयद सादिक ने आग से जुड़ी कंपनियों पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है। उन्होंने लोगों से ऐसी कंपनियों को क्षेत्र में अलग-थलग करने की अपील भी की। सिंगापुर में लोगों ने अपनी सरकार की तैयारियों पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि सरकार को पहले से पता था कि इस साल अल नीनो के कारण सूखे की स्थिति गंभीर होगी। इसके बावजूद धुएं से निपटने की पर्याप्त तैयारी नहीं की गई। सिंगापुर मैनेजमेंट यूनिवर्सिटी के कानून के एसोसिएट प्रोफेसर यूजीन टैन के मुताबिक, लोग परेशान और नाराज हैं। अगर सरकार ने उनकी शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया तो यह दूसरे देश से जुड़ा मामला घरेलू राजनीति का मुद्दा बन सकता है। सिंगापुर को गैस सप्लाई घटाने का ऐलान विवाद के कुछ दिन बाद इंडोनेशिया ने सिंगापुर को गैस का निर्यात कम करने का ऐलान कर दिया। इंडोनेशिया ने इसके पीछे अपने देश की ऊर्जा जरूरतों को वजह बताया। हालांकि, इस फैसले को सिंगापुर की आलोचना के जवाब के तौर पर देखा जा रहा है। इससे पहले इंडोनेशिया के ऊर्जा मंत्री ने चेतावनी दी थी कि जो देश इंडोनेशिया का सम्मान नहीं करेंगे, उन्हें गैस की सप्लाई रोकी जा सकती है। राष्ट्रपति प्रबोवो ने भी जंगलों में आग के मुद्दे पर बात करते हुए उन देशों का जिक्र किया था, जो इंडोनेशिया का अपमान करते हैं। हालांकि, इंडोनेशिया के कुछ हिस्सों में बिजली की कमी की समस्या भी है। वहीं, सिंगापुर का कहना है कि गैस सप्लाई में प्रस्तावित कटौती उसकी कुल रोजाना जरूरत के 2% से भी कम है। इसलिए इससे उसकी ऊर्जा आपूर्ति पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। मलेशिया ने इंडोनेशिया के खिलाफ सख्त रुख क्यों नहीं अपनाया? सिंगापुर के मुकाबले मलेशिया ने इस मामले में नरम रुख अपनाया है। मलेशिया के विदेश मंत्री मोहम्मद हसन ने इंडोनेशिया के खिलाफ औपचारिक राजनयिक विरोध दर्ज कराने या कानूनी कार्रवाई करने से इनकार किया है। उनका कहना है कि ऐसा करने का मतलब दोनों देशों के रिश्ते तोड़ने की दिशा में बढ़ना होगा। इसके बजाय मलेशिया इंडोनेशिया के साथ जंगलों में आग रोकने के लिए एक समझौता करने पर विचार कर रहा है। वह आसियान के उस समझौते का भी सहारा लेना चाहता है, जो 2003 में सीमा पार फैलने वाले धुएं की समस्या से निपटने के लिए लागू हुआ था। इस समझौते के तहत दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों को मिलकर प्रदूषण रोकने के प्रयास करने हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता प्रभावी नहीं रहा है। इसमें आग लगाने वाली कंपनियों पर कार्रवाई करने या किसी सरकार को ऐसा करने के लिए मजबूर करने का प्रावधान नहीं है। पाम ऑयल का कारोबार भी बड़ी वजह मलेशिया के नरम रुख की एक वजह उसका अपना आर्थिक हित भी है। मलेशिया भी दुनिया के बड़े पाम ऑयल उत्पादक देशों में शामिल है। पाम ऑयल की खेती के लिए जंगलों को साफ करने की प्रक्रिया को भी आग लगने की घटनाओं से जोड़ा जाता है। 2019 में जब मलेशिया ने अपने यहां फैले धुएं के लिए इंडोनेशिया के जंगलों में लगी आग को जिम्मेदार ठहराया था, तब इंडोनेशिया ने भी आरोप लगाया था कि धुआं मलेशिया की तरफ से आ रहा है। मलेशिया के विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक पाम ऑयल की खेती के लिए जंगलों को साफ करने की प्रक्रिया पर रोक नहीं लगेगी, तब तक यह समस्या दोबारा सामने आती रहेगी। विशेषज्ञों के मुताबिक, सिंगापुर का इंडोनेशिया पर मलेशिया के मुकाबले ज्यादा प्रभाव है। इसकी वजह यह है कि सिंगापुर इंडोनेशिया में सबसे बड़ा विदेशी निवेशक है और वहां के कई अमीर लोगों के लिए वित्तीय कारोबार का प्रमुख केंद्र भी है। मलेशिया फिलहाल इंडोनेशिया को नाराज नहीं करना चाहता। उसे उम्मीद है कि हवाओं का रुख बदलेगा और धुआं अपने आप छंट जाएगा। लेकिन जंगलों में आग लगने की वजहों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो यह संकट हर साल दोहराता रहेगा।