देश भर में 30% मौतें सरकारी रिकॉर्ड से बाहर:122 जिलों में महिला मृत्यु पंजीकरण 40% से कम; गांवों में हर तीसरी मौत का डेटा गायब
WHO के मुताबिक, देशभर की 84,390 मौतों का विश्लेषण किया गया। इसमें सामने आया कि देश के 707 जिलों में से 122 में महिलाओं की 40% से भी कम मौतें दर्ज हुईं। बिहार के 38 में से 37 जिलों में महिलाओं की मौतों का पंजीकरण 60% से कम था, झारखंड में यही स्थिति रही। अरुणाचल प्रदेश के कुरुंग कुमे में महिलाओं की 5%
WHO के मुताबिक, देशभर की 84,390 मौतों का विश्लेषण किया गया। इसमें सामने आया कि देश के 707 जिलों में से 122 में महिलाओं की 40% से भी कम मौतें दर्ज हुईं। बिहार के 38 में से 37 जिलों में महिलाओं की मौतों का पंजीकरण 60% से कम था, झारखंड में यही स्थिति रही। अरुणाचल प्रदेश के कुरुंग कुमे में महिलाओं की 5% मौतें ही दर्ज हुईं। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (2019-21) के अनुसार, देश में कुल मौतों में से 70.8% का ही पंजीकरण हुआ। यानी 30% मौतें सरकारी रिकॉर्ड से बाहर रह गईं। इसमें भी पुरुषों की 73% मौतें दर्ज हुईं, जबकि महिलाओं के मामले में यह आंकड़ा 64% रहा। पंजीकरण कम होने की बड़ी वजहें… आकांक्षी जिलों में 54.4% ही पंजीकरण विकास के लिहाज से पिछड़े 112 आकांक्षी जिलों में 54.4% मौतें दर्ज हुईं। अन्य जिलों में यह आंकड़ा 73.7% था। यानी दोनों के बीच 19.3% अंक का अंतर है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि सिविल रजिस्ट्रेशन एंड वाइटल स्टैटिस्टिक्स (सीआरवीएस) प्रणाली और मजबूत करने के लिए पंचायतों, आशा कार्यकर्ताओं व आंगनवाड़ी केंद्रों के जरिए परिवारों को पंजीकरण में मदद दी जानी चाहिए। --------------------------------------------- यह खबर भी पढ़ें… 7 IIT में SC-ST-OBC समुदाय से सिर्फ 18% फैकल्टी:जबकि 49.5% पद आरक्षित; इसी साल IIT बॉम्बे में जातिगत भेदभाव के आरोप लग चुके देश के सात आईआईटी में एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग की सिर्फ 18% फैकल्टी हैं, जबकि इन वर्गों के लिए कुल 49.5% पद आरक्षित हैं। पूरी खबर पढ़ें…