माता-पिता की कमाई से नहीं तय होगा आरक्षण:ओबीसी क्रीमी लेयर पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला, केंद्र सरकार की याचिका खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने यूपीएसी परीक्षाओं में OBC क्रीमी लेयर आरक्षण पर केंद्र सरकार की संशोधन याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा कि ओबीसी आरक्षण के तहत ‘क्रीमी लेयर’ तय करने का आधार केवल माता-पिता की सैलरी या आय को नहीं बनाया जा सकता। अदालत ने कहा कि किसी उम्मीदवार को आरक्षण के दायरे से बाहर करने के लिए
सुप्रीम कोर्ट ने यूपीएसी परीक्षाओं में OBC क्रीमी लेयर आरक्षण पर केंद्र सरकार की संशोधन याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा कि ओबीसी आरक्षण के तहत ‘क्रीमी लेयर’ तय करने का आधार केवल माता-पिता की सैलरी या आय को नहीं बनाया जा सकता। अदालत ने कहा कि किसी उम्मीदवार को आरक्षण के दायरे से बाहर करने के लिए केवल वेतन को पैमाना मानना सही नहीं है। इसके लिए माता-पिता के सोशल स्टेटस और उनके पद की प्रकृति को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। केंद्र सरकार को दो साल का वक्त देने से इनकार केंद्र ने PSU (सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों) और प्राइवेट सेक्टर की नौकरियों के पदों की सरकारी पदों से समानता तय करने और नई व्यवस्था बनाने के लिए दो साल का समय मांगा था। सुप्रीम कोर्ट ने यह मांग स्वीकार नहीं की। कोर्ट ने फैसले का पालन करने के लिए आठ हफ्ते का अतिरिक्त समय दे दिया है। OBC क्रीमी लेयर का मामला क्या है यह पूरा मामला कोर्ट ने कहा था - एक पत्र मुख्य नीति को नहीं बदल सकता कोर्ट ने इसी साल 14 मार्च को हुई सुनवाई में कहा था कि 2004 का एक पत्र मुख्य नीति को नहीं बदल सकता।सरकारी कर्मचारियों और पीएसयू कर्मचारियों के बीच भेदभाव करना गलत है। अगर सरकारी कर्मचारियों के बच्चों को पद के आधार पर छूट मिलती है, तो पीएसयू कर्मचारियों के बच्चों को केवल सैलरी के आधार पर आरक्षण से बाहर करना समानता के अधिकार का उल्लंघन है। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को आदेश दिया था कि वह 6 महीने के भीतर इन कैंडिडेट्स के दावों पर फिर से विचार करे। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर जरूरी हो तो इन कैंडिडेट्स को नौकरी देने के लिए अलग से पद बनाए जाएं। -------------- ये खबर भी पढ़ें... SC बोला-पेरेंट्स की सैलरी OBC क्रीमी लेयर का आधार नहीं:सिविल सेवा पास करने वाले कैंडिडेट्स को राहत सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि OBC आरक्षण में क्रीमी लेयर का फैसला केवल माता-पिता की आय के आधार पर नहीं किया जा सकता। माता-पिता या अभिभावकों के पद (पोस्ट) और सामाजिक स्थिति (स्टेटस) को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। पूरी खबर पढ़ें…