गगनयान मिशन से जुड़े वैज्ञानिकों ने ISRO छोड़ा:10 महीने में 100 इस्तीफे; केंद्रीय मंत्री बोले- लोग आते-जाते रहते हैं
इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (ISRO) से पिछले 10 महीनों में 100 से ज्यादा वैज्ञानिकों और तकनीकी कर्मचारियों ने या तो इस्तीफा दे दिया है या स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) ले ली है। नौकरी छोड़ने वाले वैज्ञानिकों में गगनयान और दूसरे अहम मिशनों से जुड़े वैज्ञानिक भी शामिल हैं। इसके बाद अंतरिक्ष विभाग ने
इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (ISRO) से पिछले 10 महीनों में 100 से ज्यादा वैज्ञानिकों और तकनीकी कर्मचारियों ने या तो इस्तीफा दे दिया है या स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) ले ली है। नौकरी छोड़ने वाले वैज्ञानिकों में गगनयान और दूसरे अहम मिशनों से जुड़े वैज्ञानिक भी शामिल हैं। इसके बाद अंतरिक्ष विभाग ने 14 जुलाई को नया निर्देश जारी किए हैं। नौकरी छोड़ने की प्रक्रिया अब सख्त की जाएगी। इस मामले में केंद्रीय विज्ञान और तकनीकी राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि ISRO में लोग आते-जाते रहते हैं। इस्तीफा देने वालों में वरिष्ठ वैज्ञानिक विक्टर जोसेफ टी भी शामिल हैं। वे LVM3 प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। यही लॉन्च व्हीकल गगनयान मिशन में इस्तेमाल किया जाएगा। इस्तीफे पर अंतिम फैसला अंतरिक्ष विभाग करेगा सरकारी निर्देश में कहा गया है कि इस्तीफों और VRS के मामलों में तेजी आने से गगनयान और दूसरे राष्ट्रीय महत्व के प्रोजेक्ट्स पर असर पड़ रहा है। नौकरी छोड़ने के आवेदनों पर अब अंतिम फैसला अंतरिक्ष विभाग करेगा। पहले ISRO केंद्रों के निदेशकों और प्रमुखों को इस्तीफे और VRS स्वीकार करने का अधिकार दिया गया था। स्टार्टअप्स में जा रहे वैज्ञानिक एक साल में लगातार दो मिशन असफल इस्तीफों से ISRO को हाल के मिशनों में भी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। ISRO का "वर्कहॉर्स" माना जाने वाला PSLV एक साल के भीतर लगातार दो मिशनों में असफल रहा। पहला- जनवरी में EOS-N1 पृथ्वी अवलोकन उपग्रह और व्यावसायिक पेलोड लेकर उड़ान भरने वाला PSLV-C62 तीसरे चरण के अंत में आई गड़बड़ी के कारण तय रास्ते से भटक गया था। दूसरा- मई 2024 में PSLV-C61/EOS-09 (RISAT-1B) मिशन भी असफल रहा था। उड़ान के करीब 203 सेकेंड बाद तीसरे चरण में चेंबर प्रेशर अचानक गिर गया, जिससे रॉकेट 529 किलोमीटर की सन-सिंक्रोनस कक्षा तक नहीं पहुंच सका और मिशन समाप्त करना पड़ा। इस दौरान रडार सैटेलाइट भी नष्ट हो गया। इसरो अपने दम पर इंसानों को अंतरिक्ष भेजने के मिशन पर काम कर रहा इन चुनौतियों के बावजूद ISRO अब गगनयान मिशन, चंद्रयान-4, भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS) और मंगलयान-2 जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम जारी रखे हुए है। गगनयान का लक्ष्य भारत को अपने दम पर इंसानों को अंतरिक्ष भेजने वाला दुनिया का चौथा देश बनाना है। ------------------------ ये खबर भी पढ़ें: इसरो का PSLV-C62 रॉकेट रास्ते से भटका, मिशन फेल:तीसरी स्टेज में गड़बड़ी आई; अन्वेषा सहित 16 सैटेलाइट लेकर गया था श्रीहरिकोटा। इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (ISRO) का साल 2026 का पहला मिशन 'PSLV-C62' फेल हो गया है। रॉकेट 12 जनवरी को सुबह 10.18 बजे आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित अंतरिक्ष केंद्र से 16 सैटेलाइट लेकर उड़ा था। ISRO चीफ डॉ. वी नारायणन ने कहा कि रॉकेट लॉन्चिंग के तीसरे चरण में गड़बड़ी आ गई, जिसके कारण वह रास्ता भटक गया। पढ़ें पूरी खबर…